छत्तीसगढ़ का रायगढ़ विधानसभा, निर्वाचन के दृष्टि से क्षेत्र क्रमांक 16 है। यह विधानसभा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से सुन्दर और समृद्ध भी है। चूंकि यह जिला मुख्यालय है और इस जिले में सैकड़ों की संख्या में इस्पात व विद्युत संयंत्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त इस जिले में कोयले की दर्जनों खदाने भी सरकारी और गैर-सरकारी स्वरूप में संचालित हैं।
Indian Philosophy
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छत्तीसगढ़ के लोक आस्था का उत्सव हरेली, श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्या को किसानों द्वारा मनाया जाने वाला त्योहार है। इस उत्सव में किसान कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं
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मणिपुर के मुद्दे पर संसद में चल रहा विपक्षियों की शुद्ध राजनीति है। विरोध के पीछे अपनी राजनीतिक लकीर को लम्बा करने का प्रयास किया जा रहा है।
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डिजिटल साक्षरता के अभाव में डिग्री कॉलेज के विद्यार्थी कर रहे हैं साइबर कैफे का रूख
डिजिटल साक्षरता के अभाव में डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक छात्र-छात्रा को जानकारी देने में सक्षम नहीं बताए जा रहे है। वहीं अभिभावकों के प्रश्न पूछे जाने पर नामांकन नहीं करने की भी धमकी देते हैं।
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इन्द्रियाँ काम के कार्यकलापों के विभिन्न द्वार हैं। काम का निवास शरीर में है, किन्तु उसे इन्द्रिय रूपी झरोखे प्राप्त हैं। अतः कुल मिलाकर इन्द्रियाँ शरीर से श्रेष्ठ हैं। श्रेष्ठ चेतना या कृष्णभावनामृत होने पर ये द्वार काम में नहीं आते। कृष्णभावनामृत में आत्मा भगवान् के साथ सीधा सम्बन्ध स्थापित करता है।
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भारतीय साहित्यों की वैज्ञानिकता को जानने के लिए जीवन को दो भागों में बांट कर देखे जाने की आवश्यकता है। एक भाग आत्म तत्व है, जिसे आत्मा कहा जाता है और उसकी जानकारी पा जाना ही जीवन का रहस्य होता है। आत्मा को समझने के लिए स्व का ज्ञान होना आवश्यक है और स्व के ज्ञान के लिए भारत के समस्त साहित्य धोषणा करते हैं कि एक दुनिया व्यक्ति के अंदर है।
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पं. श्रीराम शर्मा आचार्य – जीभ सब के मुख में है और बोलते भी सभी…
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मनुष्य में जहाँ शारीरिक-मानसिक स्तर की अनेक विशेषताएँ हैं। वहीं उसकी वरिष्ठता इस आधार पर भी है कि उसमें अंतरात्मा कहा जाने वाला एक विशेष तत्त्व पाया जाता है। उसमें उत्कृष्टता का समर्थन और निकृष्टता का विरोध करने की ऐसी क्षमता है, जो अन्य किसी प्राणी में नहीं पाई जाती। जीव-जंतुओं में उनकी इच्छा या आवश्यकता की पूर्ति के निमित्त ही कई प्रकार की प्रेरणाएँ उठती हैं।
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भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति के अनुसार फागुन और चैत्र माह वसंत ऋतु में उत्सव के महीने माने जाते हैं। चैत्र माह के मध्य में प्रकृति अपने श्रृंगार एवं सृजन की प्रक्रिया में लीन रहती है और पेड़ों पर नए नए पत्ते आने के साथ ही सफेद, लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी, नीले रंग के फूल भी खिलने लगते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे पूरी की पूरी सृष्टि ही नई हो गई है, ठीक इसी वक्त भारत में हमारी भौतिक दुनिया में भी एक नए वर्ष का आगमन होता है।
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प्रहलाद सबनानी केंद्र सरकार ने दिनांक 9 दिसम्बर 2022 को भारतीय संसद को सूचित किया…