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Bhanu Pratap Mishra

Bhanu Pratap Mishra

  • Literature

    नारी कब होगी अत्याचारों से मुक्त..!

    by Bhanu Pratap Mishra March 21, 2023
    March 21, 2023

    कवि रमेशराज धीरे-धीरे जिस पाश्चात्य संस्कृति का शिकार हमारा समाज होता जा रहा है, उसके…

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  • Literature

    सफाई अभिनय

    by Bhanu Pratap Mishra March 21, 2023
    March 21, 2023

    स्वच्छता के लिए प्रतिकों के रूप में चलाया जाने वाला अभियान मात्र अभिनय का एक उपक्रम है। जिसके माध्यम से जनता में संदेश देने का उद्देश्य कम और मीडिया में अभिनय के माध्यम से स्थान बनाने का उद्देश्य अधिक होता है। इसलिए यह स्वभाविक है कि उच्च पदों पर आसीन लोगों द्वारा इस प्रकार का अभिनय भी अधिक पारंगतता से किया जाता है। इस प्रकार के अभिनय से ऐसा प्रतीत होता है कि समाज में उनके द्वारा सकारात्मक संदेश भेजने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अन्य मुद्दे गौण हो तो इसे अभिनय ही कहा जा सकता है।

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  • Literature

    उसके हिस्से की धूप

    by Bhanu Pratap Mishra March 21, 2023
    March 21, 2023

    मई माह की चिलचिलाती धूप में झुलसते और गर्म हवाओं के तमाचे खाते हुए वह तेज़-तेज़ कदम रखते हुए घर की ओर बढ़ रहा था… दो ठ़डे-मीठे ख्यालों को मन में संजोये कि घर जाते ही माँ से कहेगा कि खूब सारी कुटी बर्फ मिला रूह अफज़ाह का शर्बत बना दें, जिसे तृप्त भाव से पी कर कूलर की मनभावन ठंडक में पाँव पसार कर साँझ तक सोता रहेगा

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  • Art and CultureEntertainmentMedia Literacy

    मनोरंजन मीडिया का एक प्रमुख कार्य

    by Bhanu Pratap Mishra March 20, 2023
    March 20, 2023

    मनोरंजन वैदिक काल से समाज का अंग रहा है। समय के साथ मनोरंजन के साधनों में परिवर्तन होते होते आज मनोरंजन फिल्मों और हास्य धारावाहिकों में खोजा जाने लगा है। पूर्व में लोक कलाओं अर्थात् लोक संचार के माध्यमों से मनोरंजन का कार्य किया जाता था। इस लिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि लोक संचार क्या है ?

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  • Indian Philosophy

    इन्द्रियाँ काम के कार्यकलापों के हैं विभिन्न द्वार

    by Bhanu Pratap Mishra March 20, 2023
    March 20, 2023

    इन्द्रियाँ काम के कार्यकलापों के विभिन्न द्वार हैं। काम का निवास शरीर में है, किन्तु उसे इन्द्रिय रूपी झरोखे प्राप्त हैं। अतः कुल मिलाकर इन्द्रियाँ शरीर से श्रेष्ठ हैं। श्रेष्ठ चेतना या कृष्णभावनामृत होने पर ये द्वार काम में नहीं आते। कृष्णभावनामृत में आत्मा भगवान् के साथ सीधा सम्बन्ध स्थापित करता है।

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  • Indian Philosophy

    आत्मा है अजन्मा और अविनाशी

    by Bhanu Pratap Mishra March 20, 2023
    March 20, 2023

    भारतीय साहित्यों की वैज्ञानिकता को जानने के लिए जीवन को दो भागों में बांट कर देखे जाने की आवश्यकता है। एक भाग आत्म तत्व है, जिसे आत्मा कहा जाता है और उसकी जानकारी पा जाना ही जीवन का रहस्य होता है। आत्मा को समझने के लिए स्व का ज्ञान होना आवश्यक है और स्व के ज्ञान के लिए भारत के समस्त साहित्य धोषणा करते हैं कि एक दुनिया व्यक्ति के अंदर है।

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  • Indian Philosophy

    वाणी का महत्व समझें

    by Bhanu Pratap Mishra March 20, 2023
    March 20, 2023

    पं. श्रीराम शर्मा आचार्य – जीभ सब के मुख में है और बोलते भी सभी…

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  • Indian Philosophy

    अंतरात्मा परमात्मा का प्रतीक-प्रतिनिधि

    by Bhanu Pratap Mishra March 20, 2023
    March 20, 2023

    मनुष्य में जहाँ शारीरिक-मानसिक स्तर की अनेक विशेषताएँ हैं। वहीं उसकी वरिष्ठता इस आधार पर भी है कि उसमें अंतरात्मा कहा जाने वाला एक विशेष तत्त्व पाया जाता है। उसमें उत्कृष्टता का समर्थन और निकृष्टता का विरोध करने की ऐसी क्षमता है, जो अन्य किसी प्राणी में नहीं पाई जाती। जीव-जंतुओं में उनकी इच्छा या आवश्यकता की पूर्ति के निमित्त ही कई प्रकार की प्रेरणाएँ उठती हैं।

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  • Education

    हमें भ्रष्टाचार मूलक शिक्षा पद्धति की है आवश्यकता

    by Bhanu Pratap Mishra March 18, 2023
    March 18, 2023

    वैदिक काल से सातवीं शताब्दी तक हमारे देश में शिक्षा की प्रणाली पूर्णतः गुरुकुल पर निर्भर हुआ करती थी। उसके पश्चात् बाह्य आक्रमण से संस्कृति में धीरे-धीरे बदलाव हुआ और उसके साथ ही शिक्षा की प्रणाली को विद्यालीन और विश्व विद्यालीन शिक्षा प्रणाली में परिवर्तित किया गया, जिसके साथ-साथ हमारी सभ्यता भी बदलती गयी और हम भी पूरी तरह बदलते गये।

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  • Media Literacy

    राजनीति में जनतंत्र का स्थान

    by Bhanu Pratap Mishra March 18, 2023
    March 18, 2023

    आजादी के कई दशकों बाद देश की राजनीति में हिन्दुत्व के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण हो या किसी अन्य समुदाय का तुष्टिकरण, भारतीय राजनीति में यह घटना पहली बार घटित हुई है। आजादी के बाद जाति और समुदायों के नाम पर लम्बे समय से ही राजनीति होती आ रही है। समस्याओं पर आधारित राजनीति की धुरी भारत में न होने का कारण उच्च मानदंडों के राजनेताओं की कमी और सामाजिक बनावट मुख्य रही है।

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